State Forest Research & Training Institute
अनुसंधान एवं विस्तार छत्तीसगढ़ वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान
राज्य के लगभग 15 प्रतिशत गांव वनों की सीमा से 5 किलोमीटर की परिधि के अंदर आते हैं, जहां के निवासी मुख्यतः आदिवासी एवं आर्थिक रूप से पिछडे हैं, जो जीविकों पार्जन हेतु वनों पर निर्भर हैं। इसके अतिरिक्त बडी संख्या में गैर आदिवासी, भूमिहीन एवं आर्थिक दृष्टि से पिछडे समुदाय भी वनों पर आश्रित हैं। इस प्रकार छत्तीसगढ के संवहनीय एवं सर्वागीण विकास के परिदृश्य में वनों का विशिष्ट स्थान है। प्रदेश में वनों के विकास और संरक्षण के लिये वानिकी अनुसंधान के अनेकों अवसर उपलब्ध है जिससे राज्य के वनों को संरक्षित एवं संवर्धित कर पर्यावरणीय स्थायित्व तथा परिस्थितिकीय सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए एक राज्य स्तरीय वन अनसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना का निर्णय लिया गया है।
इस संस्थान में राज्य के वनों के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास तथा वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता के उद्देश्यों की प्राप्ति की जावेगी।

शासन द्वारा इस संस्थान का निम्नानुसार सेट-अप स्वीकृत किया गया है :
1.    वानिकी प्रोफेशनल पद - 10
2.    वैज्ञानिक पद - 9
3.    तकनीकी पद - 32
4.    गैर तकनीकी पद 25

राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में वानिकी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण नामक दो मुख्य शाखायें होंगी जिनके अंतर्गत वानिकी एवं प्रशिक्षण के महत्वपूर्ण प्रभाग निम्नानुसार होंगे :-
 
वानिकी अनुसंधान
    
1.    सामाजिक, आर्थिकीय एवं विपणन प्रभाग
    2.    जैव विधिता एवं बीज प्रमाणीकरण प्रभाग
    3.    कृषि वानिकी एवं औषधीय पौधे प्रभाग
    4.    वन अनुवांशिकी एवं वृक्ष सुधार प्रभाग
    5.    मृदा विज्ञान एवं वनवर्धन प्रभाग
    6.    वनरक्षण शाखा (कीट एवं रोग) प्रभाग
    7.    पुस्तकालय प्रलेख, कम्प्यूटर एवं सांख्यिकी प्रभाग
प्रशिक्षण
    1.    वन प्रबंधन
    2.    वित्तीय प्रबंधन
    3.    विपणन प्रबंधन
    4.    सामाजिक विकास
    5.    सूचना प्रौद्योगिकी
नई परियोजनाएं
    
1.    कोरबा वनमंडल हेतु सर्टिफिकेशन परियोजना
    2.    जलवायु परिवर्तन सुधार परियोजना
    3.    सतत्‌ वन प्रबंधन प्रकोष्ठ का गठन
प्रस्तावित भवन : छत्तीसगढ़ राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर
CHHATTISAGRH FORESTRY RESEARCH & TRAINING INSTITUTE
Tribal dominated State Chhattisgarh consists of  50 % villages located in 5 Km. radius of forest boundaries. Major population of these villages are tribals who are very poor and almost dependent on forests. However the population other than tribal are also equally dependent on forests. Thus forests have countable role in the development of Chhattisgarh economy. This provides great opportunity for forestry research. To achieve the objectives of conservation and development of State forests and capacity building of implementation functionaries, a state level Forest Research & Training Institute is being established at Raipur.
On the occasion of World Forestry Day (21st March, 2006), foundation stone for the establishment of "State Forest Research & Training Institute" was laid by the Hon'ble Chief Minister, Government of Chhattisgarh in Baronda area (Near Vidhan Sabha Bhawan -10 K.M.at Raipur - Baloda Bazar Road) of Raipur. Building design has been finalized and Chhattisgarh State Housing Board has started construction work. Total cost of this project of building construction has been estimated at Rs. 2000 lakhs. At present Rs. 375 lakhs have been provided by the Government of Chhattisgarh.
Government has sanctioned following setup for this Institute:    
   
    1.    Forestry Professionals - 10, 
    2.    Scientists - 9,
    3.    Technical Post - 32, 
    4.    Non technical Post - 25

Two wings i.e. Forestry Research and Training will be the major constituents of this Institute and following divisions will work under these wings: 

Forestry Research 
 

  • Socio Economic and Marketing  Division
  • Biodiversity and Seed Certification Division
  • Agroforestry and Medicinal Plant Division
  • Forest Genetics and Tree Improvement Division 
  • Soil Science and Silviculture Division
  • Forest Protection (Insect and Disease) Division
  • Library, Documentation, Computer and Statistics Division

Training 
 

  • Forest Management
  • Financial Management
  • Marketing Management
  • Social Development
  • Information Technology

Training 
 

  • Certification Scheme for Korba Division
  • Climate Change Project on CDM
  • Sustainable Forest Management(SFM)Cell

 

Front view of State Forest Research and Training Institute, Raipur Chhattisgarh

कोरबा वनमंडल हेतु सर्टिफिकेशन परियोजना

कोरबा वनमंडल द्वारा फारेस्ट सर्टिफिकेशन योजना अंतर्गत विकास आयुक्त (हस्तकरघा), नई दिल्ली को परियोजना प्रेषित की गई है। इस परियोजना को एस.जी.एस. क्वालिफर कार्यक्रम के अंतर्गत प्रेषित किया गया है। एस.जी.एस. क्वालिफर प्रोग्राम फारेस्ट स्टीवार्डशिप कौन्सिल द्वारा अनुमोदित है जिसे एस.जी.एस. ग्रुप इंटरनेशनल द्वारा संचालित किया जाता है। एस.जी.एस. क्वालिफर के द्वारा प्रमाण-पत्र दिये जाने के उपरान्त संस्थान एफ.एस.सी. टे्रड मार्क का उपयोग कर सकते हैं एवं ग्राहकों को यह अवगत कराया जा सकता है कि उत्पाद में प्रयुक्त सामग्री को उत्कृष्ट प्रबंधित वनों से प्राप्त किया गया है। परियोजना से कोरबा वनमंडल के बांस एवं काष्ठ कला पर निर्भर कारीगर लाभान्वित होंगे। हस्तकरघा विकास आयुक्त, नई दिल्ली से अनुदान प्राप्त करने हेतु वन विकास अभिकरण, कोरबा का छत्तीसगढ़ सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम १९७३ के तहत पंजीकरण करवाया गया है। इस परियोजना हेतु वन विकास अभिकरण, कोरबा, वन विभाग (कोरबा वनमंडल) एवं एस.जी.एस. इंडिया गुडगांव के बीच अनुबंध को प्रमाणित वनोपज प्राप्त होंगी जिससे उनकी क्षमता में वृद्धि होगी, बाजार में उनकी पहुंच और सुगम होगी एवं क्रेताओं का विश्वास अर्जित होगा।

Forest Certification under R & D of Korba Forest Division

A project proposal regarding Forest Certification under R & D of Korba Forest Division has been submitted to the Development Commissioner (Handicrafts), New Delhi for funding. It is an integrated project under the SGS QUALIFOR Programme. The SGS QUALIFOR Programme accredited by the Forest Stewardship Council, which is conducted by SGS Group International.  Certification by the SGS QUALIFOR allows clients to use the FSC Trademark on certified products and to communicate to their customers that these products originate from sustainably managed forests. The submitted project proposal aims to help people involved in Bamboo craft and wood carving trade. The certification work will be carried out by Forest Development Agency (FDA) Korba. For being eligible for getting grant in aid from Development Commissioner (Handicrafts) FDA Korba is registered under the Chhattisgarh Societies Registration act 1973. A memorandum of understanding will be signed between FDA Korba, Forest department (Korba Division) and SGS India, Gurgaon. On certification the handicraft communities of the Korba will have certified forest produce that will ensure better market accessibility and will enhance the capacity of the handicraft community of Korba Forest Division.

जलवायु परिवर्तन सुधार परियोजना

जलवायु परिवर्तन विषय पर क्योटा में हुई कार्यशाला में सदस्य देशों के मध्य यह सहमति बनी कि ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन को कम करने हेतु यथासंभव प्रयास किये जायें। भारत उपरोक्त संधि का एक प्रमुख सदस्य देश है एवं विश्व की प्रमुख १७ जैव विविधता वाले देशों में इसका मुख्य स्थान है। छत्तीसगढ़ वन एवं जीव विधिता के दृष्टिकोण से भारत का एक प्रमुख राज्य है। अतः छत्तीसगढ में प्रचुर मात्रा में वन एवं जैव विविधता की उपलब्धता के कारण जलवायु परिवर्तन क्षेत्र में इसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान में बढ ते जैविक दबाव के कारण राज्य के प्राकृतिक संसाधन खतरे में हैं। राज्य में वन आवरण को बढाना न केवल पर्यावरण के दृष्टिकोण से आवश्यक है बल्कि इस प्रयास से राज्य को क्योटो प्रोटोकाल के अंतर्गत अतिरिक्त कार्बन क्रेडिट प्राप्त होंगे। छत्तीसगढ राज्य द्वारा इमर्जन्ट वेचर्स इंडिया प्रायेवट लिमिटेड के सहयोग से पर्यावरण सुधार हेतु एक परियोजना तैयार की गई है जिसके क्रियान्वयन से अतिरिक्त कार्बन क्रेडिट प्राप्त होंगे। इस परियोजना अंतर्गत कुल ५०००० हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण की योजना प्रस्तावित की गई है। वृक्षारोपण हेतु उन प्रजातियों का चयन किया गया है जो यहां नैसर्गिक रूप से पाए जाते हैं एवं जिनका पातन चक्र अल्प अवधि का है एवं जिनमें अच्छे कापिस आने की क्षमता है।

Climate Change Mitigation Project

Convention on Climate Change is a global treaty under Kyoto Protocol to reduce the green house gas emissions. India being one of the 17 mega biodiversity countries, Chhattisgarh is an important State from the forests and biodiversity point of view.  The State of Chhattisgarh is very much concerned about its role in mitigating green house gas emission. The natural resources of Chhattisgarh including its forest cover, soil and endemic flora and fauna are under great threat due to increasing biotic pressure. To increase forest cover in the State it is must not only to restore the environment but also important for generating carbon credits through the climate change mitigation projects under Kyoto Protocol. The State of Chhattisgarh with support of Emergent Ventures India Pvt Ltd has prepared a project report on climate change mitigation for generation and sale of carbon credits. A total of 50000 hectares degraded area has been proposed for Reforestation and Afforestation activities. Species proposed for plantations are mostly native with short rotation and good coppicing power.

सतत्‌ वन प्रबंधन हेतु सेल

भारत शासन, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्ली के परिपत्र क्रमांक/एफ १६-१२/२००५/एस. यू. (पी.टी.) दिनांक २० अगस्त २००७ में निहित निर्देशानुसार सतत्‌ वन प्रबंधन सेल का गठन प्रधान मुख्य वन संरक्षक की अध्यक्षता में किया गया जिसके समन्वयक मुख्य वन संरक्षक (बांस मिशन), हैं एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कार्य अयोजना), मुख्य वन संरक्षक (उत्पादन), वन संरक्षक बिलासपुर एवं रायपुर तथा वनमण्डलाधिकारी, मरवाही एवं धमतरी सदस्य हैं।

सतत्‌ वन प्रबंधन प्रकोष्ठ के मुख्य उद्देश्य निम्नानुसार होंगे :-

इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु उपलब्ध कार्य बिन्दु निम्नानुसार हैं :-

Creation of Sustainable Forest Management (SFM) Cell

A Sustainable Forest Management (SFM) Cell has been created in the State under the chairmanship of Principal Chief Conservator of Forests. Chief Conservator of Forests (Bamboo Mission / Research and Extension) is Coordinator. Other members of the Cell include Additional Principal Chief Conservator of Forests (Working Plan), Chief Conservator of Forests (Production), Conservator of Forests Bilaspur and Raipur, Divisional Forest Officer, Marwahi and Dhamtari.

Main functions of SFM Cell will be as follows :

To achieve these objectives action plan is as follows :

आपदा प्रबंधन योजना :-

छ राज्य वन विभाग द्वारा आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जा रही है। कार्य प्रगति पर है। जो कि निम्नं बिन्दुीओं पर केन्द्रित है :-

  • छत्तीसगढ़ राज्य के अग्नि संवेदनशील क्षेत्र
  • बाढ
  • भूकम

Disaster Management Plan :-

State Forest Department Chhattisgarh is preparing Disaster Management Plan. The work is in progress. Focus is on :-

  • Fire prone areas in the forests of the State
  • Flood
  • Earthquake

Director

State Forest Research & Training Institute, Raipur, CGH
O/O PCCF, Aranya Bhawan, Medical College Road, Raipur
Vidhan Sabha Bhawan, Baloda Bazar Road, Raipur CGH
Complex in progress at Boronda, New Vidhan Sabha
email id :- kcyifs@gmail.com